पृष्ठभूमि-
25 जून 1998 को आगरा जिला के सिंगरावली ग्राम में ब्राह्मण परिवार में जन्मे आचार्य श्री पंडित रमाकांत जी महाराज अपने बाल्यावस्था से ही भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संवाहक बने हुए हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि के माताजी श्रीमती मंजू देवी एवं पिताजी श्री विनोद कुमार शर्मा जी के साथ ही प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद अपने ताऊजी ( रामनिवास शर्मा ) की इच्छा अनुसार श्री भागीरथी संस्कृत महाविद्यालय रामघाट बुलंदशहर छात्रावास में ही रहकर प्रधानाचार्य जी परमपूज्य श्री प्रेमलाल उनियाल जी के सानिध्य में नव्यव्याकरण से पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा की शिक्षा पूर्ण की एवं पूज्य गुरुदेव श्री नानक चंद्र शास्त्री जी एवं पुरीपीठाधीश्वर श्रीमजगद्गुरुशंकराचार्य स्वामी पूज्य श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज से गुरु दीक्षा ग्रहण करते हुए वेद, शास्त्र- ग्रंथों की शिक्षा ग्रहण की । तत्पश्चात गुलाब हरी संस्कृत महाविद्यालय वृंदावन से शास्त्री एवं आचार्य प्रथम श्रेणी से उत्तरीण की।
समाजिक क्षेत्र में पदार्पण –
आपने प्राचीन भारतीय ग्रन्थों का गहनता से अध्ययन किया तो पाया कि ईश्वर के अवतारों, सन्तो, ऋषि-मुनि और महापुरूषों की सभी क्रियायें समाज का हित करने का सन्देश देती है । सभी धर्म भी समाज और उसमें रहने वाले प्राणिमात्र की उन्नति और कल्याण की बात कहते हैं । जीवन क्रियायें समाज में व्याप्त अत्याचार, अधर्म, हिंसा, अनैतिकता, धनी-निर्धन, ऊॅंच-नीच और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरूतियों और बुराईयों के विनाश और निदान के लिये समर्पित थीं । आज हम अपने अराध्य को मानते हैं लेकिन उनकी शिक्षाओं को नहीं मानते हैं । जबकि हम उनके जीवन से शिक्षा लेकर अपने वर्तमान समाज को ऐसी बुराईयों से दूर रख सकते हैं ।
इसी विचार को सिद्धांत मानकर आचार्य श्री पंडित रमाकांत जी महाराज ने श्री शिव महापुराण कथाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराईयों के खिलाफ सन्देश देने का कार्य प्रारम्भ किया । आप कथा प्रसंगों को केवल कहानी की तरह प्रस्तुत नहीं करते वरन् वर्तमान परिस्थितियों में उनकी सार्थकता और उपयोगिता सिद्ध करते हैं । जिससे श्रोतागणों में अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूकता का विकास होता है ।
सन 2014 मैं अपनी जन्मभूमि के पास ही समाधि स्थल से इन प्रेरणादायी कथाओं का प्रारम्भ आपने किया । 20 अगस्त 2023 तक 124 कथाओं के माध्यम से आज जनमानष में आपसी प्रेम, सदभाव, संस्कृति संस्कार के विचार फैला चुके हैं । निसन्देह इसका व्यापक प्रभाव भी श्रोताओं पर होता है । महाराज श्री की कथाओं में दिन-प्रतिदिन बढ़ती श्रोताओं की संख्या इस बात की गवाह है कि आज भी लोग भारतीय सभ्यता और संस्कारों में विश्वास रखते हैं और इससे जुड़ते हैं । बस जरूरत उन्हे जागरूक करने की है । महाराज श्री इस प्रयास में सफल रहे हैं ।
उमड़ता जनसैलाब-
महाराज श्री की भाषाशैली और व्यवहारिक प्रवचनों से प्रभावित होकर हजारों की संख्या में लोग कथा पण्डालों में पहुंचते हैं । CHHAVI BHAKTI Youtube चैनल के माध्यम से भी महाराज श्री के समाजकल्याणकारी विचार करोड़ो लोगों तक पहुंचंते हैं । हिन्दु, मुस्लिम, सिंख, ईसाई, जैन आदि सभी धर्मो को मानने वाले लोग आपके कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर आपके विचारों को शक्ति प्रदान करते हैं । विनम्र, मृदभाषी महाराज श्री मृदल वाणी में जब भगवान की विभिन्न लीलाओं का मार्मिक वर्णन करते हैं तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं । वहीं सामाजिक कुरूतियों और विसंगतियों पर आपकी ओजस्वी वाणी में कटाक्ष लोगों में जोश और साहस का संचार कर देती है ।
सामाजिक योगदान-
आपकी सचिवता में 6 सितंबर 2023 में मृत्युंजय महादेव परिवार सेवा संस्थान की स्थापना की गई। जिसके माध्यम से भारत के विभिन्न स्थानों पर कथाओं एवं शांति संदेश भगवान शंकर के बताए हुए मार्ग पर भक्तों को प्रेरित करने के लिए भव्य आयोजन किया जाता है। अपने कार्यक्रमों में सम्मिलित विशाल जनसमुदाय को विभिन्न सामाजिक कुरूतियों और विसंगतियों के विरूद्ध जागरूक करने के लिये कई अभियान आपने शुरू किये हैं । जिनके माध्यम से लोगों को एकजुट करके एक नये समाज के र्निमाण में उनका योगदान लिया जा रहा है ।
इन सेवा अभियानों में से कुछ निम्न प्रकार हैं ।
- गऊ रक्षा अभियान– भारत में गऊ का महत्व किसी से छिपा नहीं है । यह हिन्दुस्तानियों की माता के रूप में सम्मान प्राप्त है । फिर भी हमारे देश में निर्यात के लिये प्रतिदिन हजारों र्निदोष गायों की हत्या कर दी जाती है । इसके विरूद्ध आवाज उठाते हुये महाराज श्री ने गऊ रक्षा अभियान शुरू किया हुआ है । इन कथाओं के माध्यम से महाराज श्री लोगों को गऊ हत्या रोकने के लिये जागरूक करते हैं ।
- दहेज प्रथा– आज हमारे समय में बड़ी कुरीति है दहेज प्रथा । दहेज लोभियों द्वारा हजारों विवाहित महिलायें इसकी बलि चढ़ा दी जाती हैं । कई परिवार दहेज लोभियों की मांगे पूरी करते-करते बर्बाद हो जाते हैं । आज समाज में इस दहेज दानव को समाप्त करने की आवश्यकता है । महाराज श्री इस दिशा में विशेष रूप से प्रयास कर रहे हैं । अपने प्रत्येक कथा कार्यक्रम में सम्मिलित हजारों श्रोताओं को वह इस बात के लिये शपथ दिलाते हैं कि वह ना तो दहेज लेगें और ना ही दहेज देंगे । कथा में शामिल नवयुवक और युवतियों को वह इस बुराई से लड़ने के लिये प्रेरित करते हैं । वह पैसे से ज्यादा संस्कार और विचार की अहमियत सिद्ध करते हैं । वह धनी वर्ग को सादा विवाह समारोह आयोजित करने की सीख देते हैं । मृत्युंजय महादेव परिवार सेवा संस्थान द्वारा दहेज रहित सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने की योजना महाराज जी के द्वारा बनाई गई है । जिसमें सभी वर्गो के लोगों के पुत्र-पुत्रियों का दहेज रहित विवाह कराया जाएगा ।
- जल एंव पर्यावरण संरक्षण– आज हमारे देश में कई स्थानों पर लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं । प्रतिदिन जल की कमी के आंकड़े और भविष्य की भयावय तस्वीरे मीडिया के माध्यम से सामने आती रहती हैं । वहीं दूसरे ओर जिनके पास पर्याप्त जल संसाधन मौजूद हैं वह इसकी उपयोगिता नहीं समझ रहे हैं । भारी मात्रा में जल व्यर्थ गंवा रहे हैं । महाराज श्री इस दिशा में भी प्रयासरत हैं वह अपने कथा प्रेमियों को जल संरक्षण और सदुपयोग करने, वृक्ष लगाकर मानसून में सक्रीयता बनाये रखने के लिये प्रेरित करते हैं ।
- छूआछूत और ऊॅंच–नींच के खिलाफ– भगवान श्री कृष्ण और श्री राम ने अपने मानव जीवन मे छूआ छूत, ऊॅंच, नीच और धनी निर्धन जैसी विसंगतियों को कड़ा जवाब देकर आपसी प्रेम और सद्भाव के प्रतिमान स्थापित किये थे । कथा के मध्य आने वाले विभिन्न प्रसंग इस बात की पुष्टि करते हैं और सन्देश देते हैं कि हम सभी को ऐसी संकीर्ण मानसिकताओं से ऊपर उठकर आपस में भाईचारे के साथ व्यवहार करना चाहिये । महाराज श्री प्रभावी ढंग से हमारे पुराणों का यह सन्देश हजारों श्रोताओं तक पहुचा रहे हैं ।
- नवयुवाओं में सस्कारों की प्रेरणा– आज का युवा पाश्चात्य जगत से प्रभावित होकर अपनी प्राचीन भारतीय संस्कृति और संस्कारों से विमुख होता जा रहा है । भौतिकतावादी युग में युवक-युवतियां अपने बुजुगों, माता-पिता और समाज के प्रति कर्तव्यों से दूर हो रहे हैं । हमारे प्राचीन गन्थों के प्रसंगं एंव लोक कथायें हमें माता-पिता, गुरू, समाज के प्रति सेवा भाव की प्रेरणा देती हैं । ऐसी दशा में जरूरत है कि युवाओं में हमारे प्राचीन संस्कारों की जानकारी देकर उन्हें अपने बुजुर्गो और समाज के प्रति कर्तव्यसील बनाया जाये । इसकी शुरूआत बाल जीवन से ही की जानी चाहिये । महाराज श्री की ओजस्वी वाणी से प्रभावित बालक/बालिकायें कथा कार्यक्रमों में अधिक संख्या में भाग लेते हैं। यंहा महाराज जी बड़े प्रभावी ढंग से भारतीय संस्कार और संस्कृति की शिक्षा देकर उन्हे अपने परिवार, समाज और देश की सेवा के लिये जागरूक कर रहे हैं ।
अन्य सेवा कार्य-
आगामी योजनाऐं- मृत्युंजय महादेव परिवार सेवा संस्थान के माध्यम से विभिन्न योजनाओं को सम्पादित किया जा रहा है । इसी दिशा में राजस्थान प्रांत के जयपुर जनपद की पावन धरा पर विशाल वृद्ध आश्रम का निर्माण कार्य जल्दी- जल्द प्रारंभ होगा। गरीब असहाय बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा दिलाने की योजना पर कार्य चल रहा है। निराश्रित गौ माता के लिए एक गौशाला की परिकल्पना की गई है। बीमार जन की सेवा के लिए निशुल्क अस्पताल का भी निर्माण प्रस्तावित है।
अन्त में–
निष्कर्षतय यह कह सकते हैं कि महाराज श्री का जीवन समाज सेवा के लिये सर्मपित है । अपने विभिन्न क्रियाकलापों एंव गतिविधियों से वह समाज और देश की सेवा कर रहे हैं ।
मूलतः कथाओं के माध्यम से लोगों को जोड़कर उनमें प्राचीन संस्कृति, संस्कार, सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने का कार्य महाराज श्री कर रहे हैं । जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव आपकी कथाओं में शामिल होने वाले विशाल जनसमुदाय की उपस्थिति में देखा जा सकता हैं । पौराणिक कथा प्रंसगों को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़कर प्रभावी रूप से सिद्ध करने की कला आपको प्राप्त है । जिससे सहज ही आकृष्ट होकर जन-मानस आपके उपदेशों पर अमल करना शुरू कर देते हैं । यहीं से सामाजिक सुधारों की एक श्रृंखला शुरू होती है जो वास्तविक्ता की जमीन पर अपना असर दिखाती हैं ।


